झांसी समेत पूरे बुंदेलखंड में इन दिनों राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। वजह है प्रदेश में प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार, जिसे लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस बार क्षेत्र को प्रतिनिधित्व मिल सकता है। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी सक्रिय हो गए हैं और लखनऊ से लेकर दिल्ली तक अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
झांसी का लंबा इंतजार---
गौरतलब है कि झांसी को पिछले करीब डेढ़ दशक से मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है। आखिरी बार साल 2007 में बसपा सरकार के दौरान यहां से दो नेताओं को मंत्री बनाया गया था। इसके बाद 2012 में सपा और फिर 2017 व 2022 में भाजपा की सरकार बनने के बावजूद झांसी इस सूची से बाहर ही रहा, जबकि चुनावों में जिले ने भाजपा को मजबूत समर्थन दिया।
भाजपा की रणनीति---
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहती है, जिनकी अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ हो और जो जनता के बीच सकारात्मक संदेश दे सकें।
छह क्षेत्रों का फार्मूला---
बताया जा रहा है कि संगठन ने प्रदेश को छह हिस्सों में बांटा है और मंत्रिमंडल में भी करीब छह पद खाली हैं। ऐसे में हर क्षेत्र से एक प्रतिनिधि को शामिल करने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें बुंदेलखंड भी प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। फिलहाल क्षेत्र से ललितपुर और बांदा के एक-एक नेता राज्यमंत्री के रूप में शामिल हैं।
लोकसभा चुनाव का असर---
हालिया लोकसभा चुनाव के नतीजों ने भी पार्टी को सोचने पर मजबूर किया है। 2024 के चुनाव में बुंदेलखंड की चार में से तीन सीटें भाजपा के हाथ से निकल गईं, जबकि पिछले कई चुनावों में यहां उसका दबदबा रहा था। ऐसे में पार्टी अब इस क्षेत्र को साधने के लिए नई रणनीति बना रही है।
बोर्ड-निगम में भी उम्मीद---
इसी कड़ी में माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के साथ-साथ निगमों और बोर्डों में भी बुंदेलखंड को हिस्सेदारी मिल सकती है, ताकि क्षेत्रीय असंतोष को कम किया जा सके और राजनीतिक संतुलन स्थापित हो सके।


