टीकमगढ़ न्यूज़। पलेरा विद्युत कार्यालय की बाउंड्री वॉल अचानक भरभरा कर गिर पड़ी, लेकिन संयोगवश कोई जनहानि नहीं हुई। घटना बीती रात की है, जब क्षेत्र में लगातार भारी बारिश हो रही थी। यह दीवार हाल ही में नवीनीकरण के तहत बनाई गई थी, लेकिन तेज बारिश के कुछ घंटों के भीतर ही इसका कमजोर निर्माण उजागर हो गया।
स्थानीयों ने पहले ही जताई थी आशंका
घटना के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय नागरिकों ने बताया कि उन्होंने पहले ही घटिया निर्माण को लेकर आवाज उठाई थी। "दीवार में बहुत ही पतली सीमेंट की परत डाली गई थी, फाउंडेशन भी न के बराबर था, और सामग्री भी कमज़ोर थी," एक निवासी ने कहा।
खतरे की घंटी: निर्माण गुणवत्ता पर सवाल
यह घटना एक बार फिर से प्रशासन और निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दीवार गिरने से कार्यालय के पास बने गांधी मटिया क्षेत्र में बड़ी जनहानि हो सकती थी, लेकिन सौभाग्य से उस समय कोई मौजूद नहीं था।
जांच और ज़िम्मेदार तय करने की मांग
स्थानीय नागरिकों ने घटिया निर्माण के लिए ज़िम्मेदार ठेकेदार और निरीक्षण अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांच ली जाती, तो यह स्थिति नहीं आती।
प्रशासन की चुप्पी, विभागीय निरीक्षण पर उठे सवाल
घटना के बाद भी अब तक किसी विभागीय अधिकारी का बयान सामने नहीं आया है। यह चुप्पी बताती है कि कहीं न कहीं अंदर ही अंदर गड़बड़ियां छिपाई जा रही हैं।
अब जरूरी हो चुका है सख्त नियंत्रण
इस घटना ने साबित कर दिया है कि निर्माण के नाम पर सिर्फ बजट खर्च कर देना पर्याप्त नहीं है—नियंत्रण और गुणवत्ता जांच उतनी ही अनिवार्य है। प्रशासन को चाहिए कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाहियों को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करे।
यदि समय रहते यह दीवार दिन में गिरती तो परिणाम घातक हो सकते थे। अब आवश्यकता है कि सभी सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
(अनिल श्रीवास की रिपोर्ट) Bundelivarta.com